बिहार कांग्रेस में सियासी भूचाल, राहुल गांधी ने दिल्ली में बुलाई आपात बैठक

पटना: बिहार कांग्रेस में इन दिनों बवाल मचा है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब पार्टी के सभी छह विधायक कांग्रेस में रहने के लिए तैयार नहीं है। पार्टी मे टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस के ये सभी विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संपर्क में हैं और जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई है।

यह बैठक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर शाम 4:30 बजे आयोजित होगी। बैठक में खरगे के साथ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और प्रभारी कृष्णा अलावरु भी बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा बिहार कांग्रेस के सभी विधायक और सांसदों को बैठक में बुलाया गया है।

विधान सभा चुनाव की तस्वीर

नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी। 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए को कुल 202 सीटें मिलीं। इसमें बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें हासिल हुईं। वहीं विपक्षी महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। जिसमें आरजेडी को 25 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 6 सीटें ही जीत पाई।

कौन-कौन छोड़ सकते हैं पार्टी

कांग्रेस के जिन छह विधायकों के पार्टी छोड़ने की चर्चा है, उनमें मनीहारी से मनोहर प्रसाद सिंह, वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र प्रसाद, चनपटिया से अभिषेक रंजन, अररिया से अबीदुर रहमान, किशनगंज से मोहम्मद कमरूल होदा और फारबिसगंज से मनोज बिस्वास शामिल हैं। अगर ये सभी विधायक कांग्रेस छोड़ते हैं तो पार्टी बिहार विधानसभा में शून्य पर आ जाएगी।

नहीं आ रहे विधायक

पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत पिछले कई हफ्तों से दिख रहे थे। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सभी छह विधायक हाल के दिनों में पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। पटना के सदाकत आश्रम में आयोजित पारंपरिक ‘दही-चूड़ा’ समारोह में भी कोई विधायक शामिल नहीं हुआ। इसके अलावा 8 जनवरी को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम द्वारा बुलाई गई ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान की बैठक में भी दो विधायक- सुरेंद्र प्रसाद और अभिषेक रंजन गैरहाजिर रहे।

मुश्किल में कांग्रेस

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि अभिषेक रंजन पिछले कुछ समय से लगभग सभी कार्यक्रमों से गायब चल रहे हैं। इससे यह संकेत और मजबूत हो गया है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। अब सबकी निगाहें राहुल गांधी की दिल्ली बैठक और पटना में होने वाली इंदिरा भवन की बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों में विधायकों को साधने और पार्टी को टूट से बचाने की आखिरी कोशिश की जाएगी। अगर कांग्रेस नेतृत्व स्थिति संभालने में नाकाम रहा, तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है।