नीतीश दिल्ली रवाना, बिहार में भाजपा का सीएम? राज्यसभा नतीजों के बाद नई चर्चा

पटना: बिहार में सुशासन बाबू के नाम से मशहूर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो दशक लंबी पारी खेलने के बाद एक बार फिर राज्यसभा सांसद के तौर पर केंद्र की राजनीति में लौट रहे हैं। होली की सुबह से ही नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा थी, जिसे अब उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने मान लिया है। अब आगे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री होगा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार के गठन की कवायद राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हो जाएगी। जेडीयू के बड़े नेता और नीतीश सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इन बातों की पुष्टि करते हुए बताया कि नीतीश अपनी मर्जी से राज्यसभा जा रहे हैं।

विजय कुमार चौधरी ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात के बाद शाम में मीडिया से कहा था कि नीतीश के राज्यसभा जाने को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन इसका फैसला नीतीश कुमार को लेना है। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कल यानी 5 मार्च गुरुवार को सुबह 11:30 बजे राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। बिहार से राज्यसभा की खाली हो रही 5 सीटों के चुनाव के लिए नामांकन का कल ही आखिरी दिन है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, बीजेपी नेता शिवेश राम को भी पर्चा भरना है। राज्यसभा नामांकन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कल पटना आने की खबर है।

नीतीश कुमार की जेडीयू ने अपने कोटे के 2 राज्यसभा कैंडिडेट के नाम की घोषणा अब तक नहीं की है, लेकिन केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को तीसरा टर्म मिलना तय लग रहा है। दूसरे कैंडिडेट के नाम को लेकर कभी मनीष वर्मा, कभी निशांत कुमार की चर्चा होती रही थी। लेकिन बीजेपी ने जदयू को नीतीश को राज्यसभा जाने और अपनी जगह पर भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए मनाने को कहा। इस काम में संजय झा और ललन सिंह भी लगाए गए। सुबह संजय झा नीतीश से मिलने उनके आवास गए थे और उसके बाद संजय झा से जेडीयू के कई नेता मिले।

जेडीयू में दिन भर चले घटनाक्रम के बाद देर शाम विजय चौधरी ने बता दिया कि नीतीश कुमार कल नामांकन दाखिल कर रहे हैं। नीतीश कुमार, नितिन नवीन समेत एनडीए के 5 उम्मीदवारों का पर्चा भरवाने के लिए कल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी पटना आ रहे हैं। राज्यसभा सांसदों का टर्म एक महीने बचा है। 9 अप्रैल को रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, हरिवंश, प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें रामनाथ और उपेंद्र को दोबारा मौका मिल रहा है। नीतीश और अन्य निर्वाचित सांसदों को अप्रैल में राज्यसभा की सदस्यता की शपथ दिलाई जाएगी। नीतीश शपथ से पहले मुख्यमंत्री का पद छोड़कर दिल्ली की राजनीति करने चले जाएंगे।

विपक्षी दलों में एक कैंडिडेट पर सहमति नहीं बन पाई है। लालू यादव और तेजस्वी यदव का राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) भी कल ही अपने कैंडिडेट के नाम का ऐलान करेगा। महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, लेकिन एक सीट जीतने के लिए 41 एमएलए का समर्थन चाहिए। विपक्ष में 6 और विधायक हैं, लेकिन वो असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के 5 और मायावती की बसपा के 1 नेता हैं। ओवैसी की पार्टी अपना कैंडिडेट उतारने और महागठबंधन से उसका समर्थन करने कह रही है। अगर चुनाव में छठा कैंडिडेट उतरता है तो मतदान होगा। नहीं तो एनडीए के सारे कैंडिडेट बिना लड़े निर्विरोध जीत जाएंगे।