उत्तराखंड में बच्चों की होगी डिजिटल ट्रैकिंग, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक की होगी मॉनिटरिंग

देहरादून: उत्तराखंड में बच्चों के जन्म से लेकर उसके हायर एजुकेशन तक के हर कदम पर सरकार ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए नजर रखेगी. यही नहीं, इस दौरान बच्चे की ग्रोथ और उसके स्वास्थ्य हालत को भी सरकार दिखेगी. दरअसल, राज्य सरकार इसके लिए फिलहाल बेहतरीन तकनीकी सिस्टम को बनाने जा रही है. जिसके लिए नियोजन विभाग विभिन्न विभागों से संपर्क साधकर इस दिशा में मौजूदा स्थिति की भी जानकारी ले रहा है. ताकि शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बच्चों के मौजूदा डाटा बेस के साथ नई व्यवस्था को जोड़कर ट्रैकिंग सिस्टम को तैयार कर सके.

उत्तराखंड सरकार बच्चों से जुड़ी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और एकीकृत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. शासन स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि राज्य में बच्चों की जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक की पूरी जानकारी को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जाएगा. इसके लिए आधार से लिंक बर्थ सर्टिफिकेट, अपार आईडी (APAAR ID) और आभा आईडी (ABHA ID) जैसी व्यवस्थाओं को आपस में जोड़ने की दिशा में काम तेज किया जाएगा.

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न विभागों स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और आईटी के अधिकारियों को भी इसके लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. इस दौरान राज्य में बच्चों के जन्म से लेकर आंगनबाड़ी, प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा तक एक समग्र ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया गया.

दरअसल, राज्य सरकार चाहती है कि एक ही जगह पर बच्चों की जन्म से लेकर उसकी आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा तक की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए. यही नहीं, इस दौरान राज्य सरकार सभी बच्चों को आसानी से ट्रैक कर सके. इस दौरान बच्चों के एक स्कूल से दूसरे स्कूल या दूसरे राज्य में शिक्षा संस्थानों में जाने पर भी राज्य सरकार की तरफ से उन्हें ट्रैक किया जा सकेगा.

इस व्यवस्था के जरिए राज्य सरकार बच्चों की शैक्षणिक प्रगति के अलावा उसके रिकॉर्ड को भी देख सकेगी और इस रिकॉर्ड के आधार पर तमाम योजनाओं को बनाने में भी सरकार को मदद मिलेगी.

खास बात यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को भी तैयार करने के साथ इसकी मॉनिटरिंग रखने के लिए भी तकनीकी रूप से प्लानिंग की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत ABHA ID (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) एक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाया जाता है. जिसे भारत सरकार की आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत तैयार किया गया है. इस आईडी के माध्यम से व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक ही स्थान पर डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जा सकते हैं. इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा विकसित हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (HMIS) में बच्चों के टीकाकरण और जन्म से संबंधित डेटा पहले से ही उपलब्ध है.

खास बात यह है कि राज्य सरकार द्वारा विकसित फैमिली आईडी आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रत्येक नवजात बच्चे का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है. अधिकारियों ने सुझाव दिया कि जन्म प्रमाण पत्र को आधार से अनिवार्य रूप से लिंक किया जाए, ताकि एक यूनिक डिजिटल पहचान के जरिए बच्चे की ट्रैकिंग सुनिश्चित हो सके.

इसके अलावा शिक्षा विभाग के अंतर्गत बनी APAAR ID एक 12 अंकों की डिजिटल पहचान संख्या है, जो स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर छात्र को प्रदान की जाती है. इसके माध्यम से छात्र की शैक्षणिक प्रगति, स्थानांतरण और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है.

अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई छात्र एक स्कूल या राज्य से दूसरे में जाता है, तो APAAR ID के जरिए उसकी पूरी जानकारी को ट्रैक करना संभव होगा.

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जन्म प्रमाण पत्र को आधार से लिंक करने की अनिवार्यता के संबंध में UIDAI से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए जाएं. साथ ही, जिन विभागों द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत बच्चों का डेटा एकत्र किया जा रहा है, वे सभी संबंधित जानकारी 15 दिनों के भीतर आईटीडीए (ITDA) को उपलब्ध कराएं.