पटना: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब सिर्फ उन छात्र-छात्राओं को शिक्षा ऋण का लाभ मिलेगा, जो नैक और एनबीए जैसी मान्यता प्राप्त एजेंसियों से मूल्यांकन प्राप्त शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों में पढ़ रहे हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना मूल्यांकन वाले संस्थानों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इस योजना के तहत लोन नहीं दिया जाएगा। भागलपुर जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र के प्रबंधक रवि रंजन ने बताया कि सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों को नैक, एनबीए और एनआईआरएफ से मूल्यांकन कराने का निर्देश दिया था।
उन्होंने बताया कि जिन संस्थानों की मूल्यांकन अवधि पूरा होने को है, उन पर भी यह निर्देश लागू होगा। मूल्यांकन नहीं कराने वाले संस्थान का नाम आवेदन पोर्टल से हटा लिया जाएगा। अब तक जिले के कई निजी शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले स्टूडेंट इस योजना का लाभ लेते रहे हैं, भले ही संबंधित संस्थान का किसी भी एजेंसी से मूल्यांकन न हुआ हो। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे संस्थानों के स्टूडेंट्स के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के दरवाजे बंद हो जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और छात्रों को मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने के बाद प्लेसमेंट में सुविधा होगी।
फरवरी में आवेदन करेंगे निजी संस्थान
निर्देश के अनुसार फरवरी में निजी संस्थानों को मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना है। जिन संस्थानों का मूल्यांकन नहीं होगा, वैसे संस्थान विभाग की नई वेबसाइट पर अपनी असेसमेंट रिपोर्ट अपलोड करेंगे। इसके बाद इन संस्थानों को एआईएसएचई कोड जारी किया जाएगा। यह प्रक्रिया भी इसी माह पूरी करनी होगी। भागलपुर जिले में कई निजी संस्थानों के स्टूडेंट इस योजना का लाभ ले रहे हैं। लोन लेकर छात्र नर्सिंग, बीएड और अन्य तरह के कोर्स कर रहे हैं। मूल्यांकन में देरी करने वाले संस्थानों के बच्चों को पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन नहीं मिल पाएगा।
