खतरनाक मांझे पर सख्त केंद्र सरकार, AWBI ने राज्यों को लिखा पत्र, लगेगा निर्माण और भंडारण पर प्रतिबंध!

देहरादून: उत्तराखंड समेत देश भर के तमाम राज्यों को खतरनाक मांझे को लेकर प्रतिबंध से जुड़ा पत्र भेजा गया है. खास बात ये है कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने राज्यों को इस पर सख्ती बढ़ाते हुए पूर्व में भी दिए गए आदेशों का पालन करवाने के लिए कहा है. दरअसल, पतंगबाजी में इस्तेमाल के दौरान ये मांझा ना केवल इंसानों बल्कि जीव जंतुओं के लिए भी मुसीबत बनकर सामने आया है. जिस पर अब सख्ती के साथ प्रतिबंध की बात कही गई है.

भारत में पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल होने वाले खतरनाक मांझे को लेकर केंद्र सरकार के अधीन भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है. बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत जारी अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने की सिफारिश करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से खतरनाक मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. इस संबंध में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) के अध्यक्ष डॉ. मुत्थुकुमारस्वामी बी की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और प्रमुख वन संरक्षकों को पत्र भेजा गया है.

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कांच, धातु, नायलॉन या अन्य सिंथेटिक पदार्थों से बने मांझे न केवल पक्षियों और जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं. खासतौर पर पतंगबाजी के दौरान इन मांझों से पक्षियों की गर्दन कटने, उड़ान में घायल होने और सड़क दुर्घटनाओं तक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

एडब्ल्यूबीआई ने अपने पत्र में बताया कि वर्ष 2013 से ही इस मुद्दे पर लगातार राज्यों को चेताया जा रहा है. वर्ष 2014 में पर्यावरण मंत्रालय ने भी सभी राज्यों को निर्देश जारी कर खतरनाक मांझे पर रोक लगाने को कहा था. इसके बाद 11 जुलाई 2017 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी स्पष्ट आदेश दिए थे कि नायलॉन या सिंथेटिक सामग्री से बने मांझे, जिन पर कांच या धातु की परत चढ़ी होती है, उन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए

एडब्ल्यूबीआई ने यह भी रेखांकित किया कि कई राज्यों में प्रतिबंध के बावजूद नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण हर साल मकर संक्रांति, स्वतंत्रता दिवस और अन्य पर्वों पर बड़ी संख्या में हादसे सामने आते हैं. ऐसे में राज्यों को निर्देश दिए जाएं कि वे निगरानी तंत्र मजबूत करें. अवैध मांझे की बिक्री पर कार्रवाई करें और जन-जागरूकता अभियान चलाएं.

बोर्ड ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर शीघ्र कार्रवाई करते हुए अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करेगी, ताकि पूरे देश में खतरनाक मांझे पर एकसमान और प्रभावी प्रतिबंध लागू हो सके. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता को भी मजबूती मिलेगी.