लक्सर में बाल अधिकार एवं सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित

हरिद्वार: उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आज लक्सर ब्लॉक सभागार में “बाल अधिकार एवं सुरक्षा, जन-जागरूकता एवं संवेदनशीलकरण” विषय पर एक व्यापक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की आम जनता, ग्राम प्रधान, ब्लॉक एवं पंचायत प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त लगभग 5000 बच्चों को वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जोड़कर बाल अधिकारों, सुरक्षा एवं संरक्षण के विषय में जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, आयोग के सदस्य दयाल सिंह बिष्ट आयोग के अनु सचिव श्री एस.के. सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की न्यायिक अधिकारी सिमरनजीत कौर, खण्ड विकास अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी हरिद्वार, खण्ड शिक्षा अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा, संरक्षण, जन-जागरूकता तथा समाज के विभिन्न वर्गों को बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना था। कार्यक्रम में सभी विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, सेवाओं एवं बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों एवं बच्चों को जागरूक किया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल सरकारी संस्थाओं की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए समाज, परिवार, विद्यालय, प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सभी से बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने तथा किसी भी प्रकार के शोषण, हिंसा अथवा अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी तत्काल संबंधित विभागों को देने का आह्वान किया।

कार्यशाला से पूर्व डॉ. गीता खन्ना ने क्षेत्र के दो विद्यालयों का औचक निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनमें राष्ट्रप्रेम, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों के विकास पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत के महत्व से अवगत कराया तथा निर्देशित किया कि सभी विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा से पूर्व राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, जिससे बच्चों में राष्ट्र के प्रति सम्मान, एकता एवं राष्ट्रीय चेतना का विकास हो।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षित वातावरण के निर्माण तथा बाल संरक्षण संबंधी जन-जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।