सर्वदलीय बैठक में दिए संकेत, संसद के मानसून सत्र में सरकार अहम विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में परिसीमन विधेयक को लेकर एक अहम राजनीतिक संकेत सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रस्तावित परिसीमन के दौरान दक्षिण भारत के राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सीटों के अनुपात पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है, तो पार्टी विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, पार्टी ने केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्ट और ठोस आश्वासन की मांग भी की है।
20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है। इनमें परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार विभिन्न दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी पर DMK की चिंता
सर्वदलीय बैठक के दौरान DMK ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसलिए परिसीमन के बाद उनकी संसदीय हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यदि केंद्र यह सुनिश्चित करता है कि तमिलनाडु सहित अन्य दक्षिणी राज्यों की सीटों का अनुपात सुरक्षित रहेगा, तो विधेयक पर सकारात्मक रुख अपनाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि सरकार पहले भी दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आने का भरोसा दे चुकी है, लेकिन DMK अब इस आश्वासन को विधायी प्रावधानों में स्पष्ट रूप से शामिल देखना चाहती है।
छंटनी नहीं, राजनीतिक सहमति भी सरकार की चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आवश्यक समर्थन जुटाने की है। इसी वजह से उन दलों से भी संवाद बढ़ाया जा रहा है, जो औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं या जिनका रुख अभी स्पष्ट नहीं है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद संसद में संख्या संतुलन में बदलाव की चर्चा भी तेज हो गई है, जिससे सरकार को कुछ अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार सरकार परिसीमन के दौरान लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव लेकर आगे बढ़ सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने पर विचार किया जा रहा है। इसमें अधिकांश सीटें राज्यों को और शेष केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित करने का प्रारूप तैयार किया गया है।
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था में दक्षिण भारत के राज्यों की संसदीय हिस्सेदारी को वर्तमान अनुपात के करीब बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसी भी क्षेत्र को प्रतिनिधित्व में नुकसान न हो।
महत्वपूर्ण विधेयकों पर रहेगी नजर
मानसून सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक के अलावा महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’, एफसीआरए संशोधन, शिक्षा, खेल, न्यायपालिका और कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा और उन्हें पेश किए जाने की संभावना है।
22 जुलाई के बाद तस्वीर हो सकती है साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार और विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच बातचीत और तेज हो सकती है। यदि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का समाधान निकाल लिया जाता है, तो परिसीमन विधेयक पर व्यापक सहमति बनने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में संसद का यह मानसून सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
