रुद्रप्रयाग: भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में आस्था, परंपरा और वैदिक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। नवनिर्मित भव्य भवन में पंचकेदार के शिवलिंगों की विधिवत प्रतिस्थापना वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ सम्पन्न हुई। यह पावन अवसर क्षेत्र के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। कार्यक्रम के दौरान राॅवल भीमाशंकर लिंग, विद्वान आचार्यों और पंचगाई के हक-हकूकधारियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। सुबह से ही मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और यज्ञ का शुभारंभ हुआ, जिसमें वेद ऋचाओं के मधुर और प्रभावशाली उच्चारण के बीच पंचकेदार शिवलिंगों को विधिपूर्वक नवनिर्मित भवन में प्रतिष्ठापित किया गया।
आयोजन के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और दिव्य बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनी। रावल भीमाशंकर लिंग ने अपने संबोधन में कहा कि पंचकेदार परंपरा का अत्यंत गूढ़ धार्मिक महत्व है, और इन शिवलिंगों की पुनः प्रतिष्ठा से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजन संपन्न कराते हुए बताया कि शास्त्रों में शिवलिंगों की विधिवत प्रतिस्थापना को क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना गया है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपनी धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। हक-हकूकधारियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि लंबे समय से नवनिर्मित भवन में शिवलिंग स्थापना की प्रतीक्षा थी, जो अब पूर्ण हो चुकी है। इससे श्रद्धालुओं को भविष्य में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और मंदिर की व्यवस्थाएं और सुदृढ़ होंगी। मंदिर प्रभारी विजेन्द्र बिष्ट ने जानकारी दी कि पंचकेदार शिवलिंग युगों से ओंकारेश्वर मंदिर में स्थापित थे, लेकिन पुराने भवन के जीर्ण-शीर्ण होने के कारण इन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से नवनिर्मित भवन में प्रतिस्थापित किया गया है। इस अवसर पर पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्वाण, प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग, बागेश लिंग, वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी, देवी प्रसाद तिवारी, सरिता बुटोला, महादेव सिंह, पूनम राणा सहित अनेक गणमान्य लोग एवं हक-हकूकधारी उपस्थित रहे।
स्थानीय जनता में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। लोगों ने इसे अपनी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक ऐतिहासिक क्षण बताया। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा और गति मिलेगी। पंचकेदार शिवलिंगों की इस विधिवत प्रतिस्थापना के साथ ही ओंकारेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है, जिससे यह क्षेत्र एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और सशक्त होकर उभरेगा।
