Sunday, April 21, 2024
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण स्थापना दिवस समारोह आयोजित

लखनऊ: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने अपना 174वां स्थापना दिवस समारोह दिनाँक 04 मार्च 2024 को सेक्टर- ई, अलीगंज, लखनऊ स्थित उत्तरी क्षेत्र कार्यालय परिसर में धूम-धाम एवं वैज्ञानिक आख्यानों के साथ मनाया। इस समारोह में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में सेवारत अधिकारियों तथा कर्मचारियों के साथ लखनऊ स्थित अन्य वैज्ञानिक संस्थानों जैसे भूगर्भ विज्ञान प्रभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, सी. जी. इङ्ग्ल्यू.बी. के क्षेत्रीय निदेशक, यू.पी. आर. सैक. के निदेशक, एच. ए. एल. के महा प्रबंधक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की तथा अपने संस्मरणों को साझा किया।

इस समारोह के मुख्य अतिथि बाबासाहेब भीमराव अँबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉसंजय सिंह थे. जबकि श्री शिवप्रकाश, मुख्य अभियंता, नेशनल वाटर डेवलपमेण्ट अथारिटी विशिष्ट अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता श्री नरेंद्र विठोबा नितनवारे, अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष महोदय ने की। स्थापना दिवस समारोह में लखनऊ जनपद के जनपद संसाधन मानचित्र तथा पिछली छमाही की गतिविधियों को दर्शाती पुस्तिका का विमोचन किया गया।

अतिथियों का स्वागत करते हुये श्री राकेश मिश्रा, निदेशक, नीति सहयोग तंत्र ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वर्षों के गौरवयमयी इतिहास की चर्चा की। उन्होंने बताया कि अट्ठारवीं शताब्दी में स्टीम इंजन के 173 आविष्कार के पश्चात् औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई। स्टीम इंजन को चलाने के लिए कोयले की आवश्यकता थी, इस प्रकार औद्योगिक विकास के लिए ऊर्जा खनिजों की खोज का प्रारंभ हुआ। तत्कालीन भारत के औपनिवेशिक शासकों द्वारा उद्योग आधारित व्यापार के लिए तेज व प्रभावी यातायात की आवश्यकता को देखते हुए कोयले की योजनाबद्ध खोज के लिए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना की गई। सन

1851 में स्थापित इस विभाग रूपी ‘वट वृक्ष’ की शाखायें जैसे C /ILMECL /AMD /CGWB/ONGC/ NMDC /CMPDIL इत्यादि इससे निकलकर एक स्वतंत्र संस्था के रूप में राष्ट्र निर्माण में बेहतरीन योगदान प्रदान कर रही हैं। इसी क्रम में श्री शिव प्रकाश, मुख्य अभियंता ने राष्ट्र निर्माण में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के बृहत्त योगदान

की चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक भारय की प्रगति के विविध आयामों में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पग चिन्ह हर जगह देखे जा सकते हैं। श्री शिव प्रकाश ने विभाग द्वारा अन्य विभागों के साथ सामंजस्य से किये जा रहे भूवैज्ञानिक अध्ययनों की विस्तृत चर्चा की और बताया कि किस प्रकार ऐसे अध्ययन देश की वर्तमान अपेक्षाओं को पूरा करने और भविष्य की चुनौतियों हेतु तैयार रहने में सहायक होंगे। मुख्य अतिथि डॉसंजय सिंह ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के क्रिया कलापों की प्रशंसा करते हुये देश के दुर्गम एवं कठिन भौगोलिक स्थितियों में भूवैज्ञानिकों द्वारा किये जा रहे कार्यों पर अतीव संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि संसाधनों का दोहन करते समय हमें निर्लिप्त भाव से मानव व समाज के समग्र विकास के लिये जितना अति आवश्यक हो उतना ही दोहन करना चाहिये। इस विषय पर कुलपति महोदय ने अनेक ग्रंथों को उद्धृत किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष श्री नरेंद्र विठोबा नितनवारे ने ऋगुवेद के सुक्तों का उद्धरण देते हुये प्रकाश डाला कि सृष्टि की रहस्यमयी उत्पत्ति को किस प्रकार भूवैज्ञानिकों ने समझा और इस सूचना को सामान्य जन के लिये उपलब्ध कराया। उन्होंने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विविध कार्यों को देश के विकास में किस प्रकार प्रयोग किया जा रहा है इस विषय पर गहराई से चर्चा की और निकट विगत में किये गये महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्यों पर प्रकाश डाला।

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